अकाउंट असिस्टेंट की चुदाई – Free Hindi Sex Stories

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मेरे ऑफिस में नयी आई अकाउंट असिस्टेंट से मेरी अच्छी दोस्ती हो गयी. उसने मुझसे कोई गर्लफ्रेंड बनवाने का वादा किया. जब वो ये ना कर सकी तो उसने मुझे क्या दिया?

नमस्कार दोस्तो! मेरा नाम विकास है, मैं भारत के हृदय स्थली से हूं। 26 साल का सीधा साधा नौजवान जो अपने जीवन में मस्त और एक अच्छे कार्यालय में मानव संसाधन अधिकारी (HR Officer) के पद पर कार्यरत हूँ।
मैं अन्य लेखकों की तरह बहुत बढ़ा चढ़ाकर तो नहीं लिखूंगा. हां फिर भी मैं ऊपर वाले के द्वारा बहुत ही अच्छे साइज और आकार के लण्ड का मालिक हूं जोकि साढ़े 7 इंच लंबाई का है।

मेरी सेक्स लाइफ एकदम नीरस थी।
एक दिन मेरे कार्यालय में अकाउंट असिस्टेंट की पोस्ट के लिए इंटरव्यू होने थे. कंपनी के मुख्य अकाउंट ऑफिसर को इंटरव्यू लेना था और उसके बाद की सारी प्रक्रियाओं के लिए सारे प्रतिभागियों को मेरे पास आना था।

अमूमन यह मेरे लिए हर दूसरे तीसरे दिन होने वाली सामान्य प्रक्रिया थी. किंतु प्रोफाइल अकाउंट असिस्टेंट की थी इसलिए मेरे मन में यह मुझे पहले से पता था कि इस इंटरव्यू के लिए लड़कियों की संख्या ज्यादा रहने वाली है. इसलिए मैं थोड़ा सा उत्साहित भी था।

दोपहर के खाने के समय तक लगभग सारे प्रतिभागियों के पहले राउंड के इंटरव्यू हो चुके थे. दोपहर बाद कंपनी की पॉलिसी और सैलरी की जानकारी सारे प्रतिभागियों को देना और उनको इस बारे में जो औपचारिकता थी वह मुझसे होनी थी।

मैं अपने काम में बिजी था. तभी मेरी सीट पर एक 22-23 वर्ष की साधारण सी दिखने वाली एक लड़की जो पहला राउंड क्लियर होने के बाद मेरे पास अगले राउंड के लिए आई।
वह दिखने में एकदम साधारण सी लड़की थी जैसे आम लड़कियां होती हैं. और मेरे मन में उसके बारे में किसी तरह की कोई ख्याल नहीं था।
और लड़की प्रोफाइल के लिए चुन ली गई।

क्योंकि कंपनी बहुत ज्यादा बड़ी नहीं थी और एकाउंट्स डिपार्टमेंट में इतना ज्यादा काम नहीं होता था इसलिए उस लड़की को मेरे साथ एचआर डिपार्टमेंट में भी लगा दिया गया और वह मेरे असिस्टेंट के रूप में भी काम करने लगी।

उसके साथ काम करते हुए मुझे पता लगा कि वह दूसरे शहर की रहने वाली है और मेरे शहर में वह अकेली रहती है. उसका एक बॉयफ्रेंड भी है जोकि उससे उम्र में काफी बड़ा है। साथ में काम करते हुए उसके और मेरे बीच बातचीत और जान पहचान भी बढ़ने लगी।

एक दिन यूं ही उसने मुझसे बातों बातों में पूछा कि क्या मेरी भी कोई गर्लफ्रेंड है. तो जो सच था वह मैंने उसे बता दिया कि नहीं मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है।
उसने इस बात पर अफसोस जताया.

तो मैंने उससे कहा कि अगर तुम चाहो तो अपनी किसी फ्रेंड से मेरी जान पहचान करवा दो तो मैं भी कोई गर्लफ्रेंड बना लूंगा. क्योंकि यहां ऑफिस के काम से मुझे फुर्सत नहीं मिल पाती है। जिसके कारण मैं आज तक कोई गर्लफ्रेंड नहीं बना पाया हूं.

तो उसने मुझसे वादा करते हुए कहा- 1 महीने के अंदर मैं अपनी किसी भी सहेली से आपको मिलवा दूंगी।

इस बात को 1 महीने से भी करीब ऊपर समय बीत जाने के बाद भी उसने मुझसे अपना किया वह वादा पूरा नहीं किया.
तो एक दिन मैंने उसे कहा- यार, तुमने मुझसे एक महीने का वादा किया था. परंतु इतना समय बीत जाने के बाद भी अभी तक तुमने मुझे अपनी किसी सहेली से नहीं मिलवाया है.
उसने कहा- जल्दी ही आपका काम हो जाएगा.

तो इस बार मैंने उसे लगभग डराते हुए कहा- अगर तुमने मुझे किसी लड़की से नहीं मिलाया तो मैं तुम्हारा ही नंबर लगा दूंगा।
इस बात से वह थोड़ा डर गई और उसने मुझे कहा- मैं तो आपकी मदद करना चाह रही थी. आप तो मेरे ही पीछे पड़ गए. जबकि आप जानते हो मेरा पहले से ही एक बॉयफ्रेंड है।

हालांकि मैंने उसे यह बात मजाक में कही थी क्योंकि काफी समय साथ में काम करते हुए हम दोनों एक दूसरे से काफी फ्रेंक हो चुके थे।

बाद में मैंने उस कंपनी से नौकरी छोड़ दी और अपने ही छोटे-मोटे कामों के लिए एक धंधा शुरू कर दिया।

1 दिन बरसात के मौसम में मैं अपने दोस्त के साथ उसके घर पर बैठा हुआ था. मेरे फोन पर उसी लड़की का फोन आया.
उसने मुझसे पूछा- आप कहां हो?
हम दोनों की बात हमेशा फोन पर होती रहती थी इसलिए मैंने उसे बताया- मैं अपने दोस्त के घर पर हूं.

तो उसने मुझसे कहा- क्या आप अभी मेरे घर आ सकते हो?
मुझे लगा शायद उसे कुछ जरूरी काम होगा तो मैंने उससे कहा- ठीक है, मैं आधे घंटे में पहुंचता हूं।

मैं अपने दोस्त के घर से निकला और करीब 25 मिनट में उसके घर पर पहुंचा और घर में जाकर बैठा और मैंने उससे पूछा- क्या हुआ जो अचानक से मुझे तुमने इस तरह बुलाया है?
उसने जो कहा … उसके बाद मेरे होश उड़ गए.
मुझसे उसने कहा- आपने कहा था कि अगर मैं अपनी किसी सहेली से आपको नहीं मिलवाऊँगी तो आप मेरा ही नंबर लगा दोगे. तो आज आप नंबर लगा सकते हो।

मैं 2 मिनट के लिए हक्का बक्का रह गया और समझ नहीं पाया कि क्या यह वाकई में सच है. क्योंकि मैंने वह बात उसे मजाक में कही थी. पर मुझे नहीं पता था कि असल में यह हो जाएगा।
अब अंधा क्या चाहे दो आंखें।
पर मुझे समझ नहीं आ रहा था कि शुरुआत कैसे की जाए।

मैंने उसे हल्के से पकड़ा और अपनी तरफ खींचा और उसे अपने पास बैठा लिया।

उसके बाद मैंने अपने दोनों हाथों से उसे पकड़ते हुए अपने गले से लगाया और गले से लगाने के बाद मुझे अपने सीने पर उसके नर्म नर्म मम्मे बड़े अच्छे लग रहे थे।

फिर मैंने उसके होंठों पर अपने होंठों को रखकर उसके होंठों से रस पीना चालू कर दिया. वाकयी में बहुत आनंददायक था और नीचे मेरी पैंट में मेरा लण्ड खड़ा होकर तूफान मचाने लगा।

वह दिखने में साधारण थी लेकिन उसने मम्मे काफी बड़े बड़े थे जिन्हें मैं हमेशा चूसने और हाथों में लेकर खेलने के सपने देखा करता था।

मैंने बिना देरी किए उसकी टीशर्ट निकाल कर उसके मम्मों को आजाद कर दिया. वह शायद पूरे तरीके से तैयार थी इसलिए उसने अंदर ब्रा नहीं पहनी हुई थी. मम्मों के आजाद होते ही मैं उन पर टूट पड़ा और उन्हें दबा दबा कर, चूस कर लाल कर दिया।

ऑफिस में साधारण सी दिखने वाली लड़की उस बंद कमरे में आज पूरी तरह से एक कयामत की तरह दिख रही थी. वह मेरी स्थिति समझ गई और उसने मेरी पैंट की बेल्ट खोलकर मेरी पैंट से मुझे आजाद कर दिया.
फिर मेरा अंडरवियर भी निकाल दिया और किसी भूखी शेरनी की तरह मेरे लण्ड पर टूट पड़ी. वो मेरा लंड अपने मुंह में लेकर बिल्कुल किसी लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी।

मुझे भी सेक्स किये हुए काफी समय हो चुका था इसलिए 3 से 4 मिनट में ही मैंने अपना पूरा का पूरा माल उसके मुंह में ही छोड़ दिया। जिसे वह बिल्कुल मलाई की तरह चाट कर साफ कर चुकी थी।

अब समय आया था मुख्य काम को करने का।
मैंने उसकी कैपरी को उतार कर एक तरफ़ फेंक दिया. और मैंने देखा कि उसने पैंटी भी नहीं पहनी हुई थी. उसकी चुत एकदम चिकनी और बिना बालों वाली थी. जिस कारण मैं अपने आप को रोक नहीं पाया.

और मैंने उसके दोनों पैर खोल कर अपना मुंह उसके पैरों के बीच में डालकर उसकी चुत को चाटना शुरु कर दिया.

मेरे ऐसा करने से वह बिल्कुल पागलों की तरह चिल्लाने लगी। करीब 2 मिनट बाद उसकी चुत से बेतहाशा पानी बहने लगा जिसे मैंने पूरा का पूरा चाट कर साफ कर दिया।

उसके बाद उसने मेरा सर अपनी चुत पर बहुत कस के दबा दिया और मुझसे चुत में मेरा लंड लेने के लिए पागलों की तरह सर को इधर-उधर पटक कर मेरा नाम चिल्लाने लगी.

क्योंकि हालत मेरे लण्ड की भी बहुत खराब हो चुकी थी तो मैंने उसकी चुत को चाटना छोड़कर फटाफट अपना लंड उसकी चूत के मुंह पर रखा. एक ही झटके में मैंने अपना आधा लंड उसकी चूत में डाल दिया.

मेरे अचानक हुए इस हमले से वह सकपका गई और बहुत तेजी से चिल्ला पड़ी. हालांकि वह पहले भी चुदवा चुकी थी लेकिन फिर भी मेरे साढ़े 7 इंच लंबे और ढाई इंच मोटे लंड को झेल नहीं पाई और बुरी तरह से चिल्लाने लगी.
क्योंकि उसने पहले जो 2 लण्ड लिए थे, वे मेरे सामान के मुकाबले लगभग आधे थे.
यह बात उसने बाद में खुद मुझे बताई थी.

जैसे ही मैंने अपना लंड उसकी चूत के अंदर डाला तो धीरे-धीरे उसे भी मजा आने लगा. हालांकि दर्द भी उसे हो रहा था. लेकिन मजा धीरे-धीरे उस दर्द के ऊपर हावी होने लगा.
उसने अपने दोनों हाथों से मेरी पीठ पर नाखून लगाना शुरू कर दिया. मैं समझ गया कि अब यह पूरी तरीके से मजे में आ चुकी है.

उसके बाद उसने मेरी गर्दन पर मेरे कंधों पर दांत लगाना शुरू किया. दर्द से मैं भी तड़प उठा और इसका बदला मेरे लंड ने उसकी चूत का पूरी तरह से बाजा बजा कर लिया.

वह चुदवाने में बहुत मास्टर थी और बिल्कुल अंग्रेजी ब्लू फिल्मों की तरह चिल्ला चिल्ला कर मेरा उत्साह बढ़ा रही थी.

बहुत देर तक एक ही पोजीशन में चोदते रहने पर मुझे मजा नहीं आ रहा था तो मैंने उसे घोड़ी बन जाने के लिए कहा.

उसके बाद मैंने पीछे से उसकी चूत में घोड़ी बनाकर अपना पूरा लंड डाल दिया और उसके बाद मैंने उसके कूल्हों पर चपत लगाना शुरू कर दिया.
मेरे इस तरह से मारने से उसके दोनों पुट्ठे लाल हो गये क्योंकि वह एकदम दूध जैसी सफेद थी.

उसके बाद मेरी नजर उसकी गांड के छेद पर गई जो पूरी तरह से पैक नजर आ रहा था.
मैंने उससे पूछा- क्या तुमने कभी अपनी गांड को भी चुदवाया है?
तो उसने मुझे कहा- नहीं … गांड चोदवाने में मुझे कोई मजा नहीं आता. इसलिए कभी नहीं करवाया. मेरे पुराने बॉयफ्रेंड ने ट्राई किया था, एक बार मेरी गांड में लंड डालने की कोशिश की थी. लेकिन दर्द की वजह से आगे नहीं कर पाए.

मैंने बहुत सारा थूक उसकी गांड के छेद पर डाला और धीरे से उसे समझ ना पड़े, ऐसा करते हुए आधा लंड उसकी गांड में डाल दिया.

अचानक हुए इस प्रहार को वह झेल नहीं पाई और घोड़ी बनी बनी ही बिस्तर पर गिर गई.
और उसने रोना शुरू कर दिया.

मैंने मामला बिगड़ता देख उसे बड़े प्यार से समझाया और उसके बाद धीरे-धीरे अपना पूरा लंड उसकी गांड के छेद में भी डाल दिया.

थोड़ी देर दर्द से वह रोती रही. परंतु बाद में उसे भी मजा आने लगा और वह फिर से उसी तरीके से चिल्ला चिल्ला के अपनी गांड चुदाई का मजा लेने लगी.

अब मेरा लंड कभी उसकी गांड में जाता और कभी उसकी चूत में!

बस इसी तरह उसके चुदाई करीब आधे घंटे तक चली. उसके बाद मैंने अपना पूरा पानी उसके पेट पर निकाल दिया क्योंकि उसके सेफ पीरियड नहीं था.

यह थी मेरी चुदाई की एक छोटी सी दास्तान!
मेरी कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया [Hindi sex stories] पर भेज कर मेरा उत्साह बढ़ाएं।

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