XXX Desi sex khni  हसीन मेहबूबा

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मेरा नाम अरमान है. मैं राजस्थान के कोटा शहर का रहने वाला हूँ। मेरा कद 6 फीट और उम्र साल है. अच्छी बॉडी वाला लड़का हूँ। मैं दूसरों की तरह यह तो नहीं कहूंगा कि मेरा लण्ड 8 इंच का है, मगर यह जरूर कहूंगा कि मेरा लंड किसी भी औरत और लड़की को xxx esi chui से संतुष्ट कर सकता है।

आशा करता हूँ के इस कहानी का पहला भाग आपने पढ़ा होगा – > Hotsex

अब आगे…

मैंने उसकी पैर की उंगलियों को चूसना शुरू किया. फिर धीरे-धीरे उसकी टांगों को चाटते-चूमते उसकी जांघों पर पहुंचा.

वहाँ भी अपने प्यार की निशानियां दे रहा था. हम दोनों अपनी वासना में बहे जा रहे थे।

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अब मैं धीरे से उसकी पैंटी की तरफ बढ़ा.

उसे जैसे ही मैंने छुआ तो अक्षिता ने फिर एक आहहह … भरी.

उसकी पैंटी पूरी तरह से गीली हो गयी थी. उसके कामरस की बहुत ही मोहक गंध मुझे पागल किये जा रही थी।

फिर मैं धीरे धीरे उसकी पैंटी उतार रहा था और चूमता भी जा रहा था. उसकी चूत के ऊपर की बालों वाली जगह बिलकुल क्लीन थी.

वहाँ रोम छिद्रों के अलावा कोई निशान नहीं था.

मैंने उस जगह को चूमा.

मैं उसके हर हिस्से पर अपने प्यार की निशानी छोड़ रहा था।

फिर मैंने पूरी पेंटी उतार दी और उसकी चूत बिल्कुल छोटी सी, गुलाब की पंखुड़ियों की तरह लग रही थी.

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उसकी फांकों को मैंने प्यार से किस किया और चुम्बनों की झड़ी लगा दी उसकी कोमल चूत पर.

अक्षिता मेरे इस प्यार से पागल होती जा रही थी। मैंने अपनी उंगलियों से उसकी फ़ांकों को फैलाया.

अंदर से ऐसी जैसे खून उतर आया हो.

बिल्कुल लाल थी उसकी चूत.

ऐसी चूत मैंने कहीं नहीं देखी.

मैं धीरे से उसके पास गया और उसे चाटने लग गया.

अक्षिता जोर-जोर से आहें भर रही थी और अपने हाथ को मेरे सिर पर रख कर जोर से अपनी चूत पर दबा रही थी.

उसका दबाव मुझ पर बढ़ता जा रहा था. वो जोर-जोर से सिसकी भर रही थी.

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वो झड़ने के करीब थी. मैंने अपनी चाटने की स्पीड और बढ़ा दी और उसके क्लीट को भी चूसने लग गया.

उसकी सिसकारियां और तेज हो गयीं और उसने अपनी टांगों को मेरे सिर पर जोर से दबा दिया.

वह जोर से झड़ने लग गयी. उसकी चूत के अमृत रस से मेरा पूरा चहरा गीला हो गया।

वो अपनी सांसों पर काबू कर रही थी. मैं ऊपर जा कर उसे फिर किस करने लग गया।

अब उसने मुझे नीचे लेटाया और मुझे किस करने लग गयी. वह धीरे धीरे नीचे की ओर बढ़ रही थी.

उसने मेरे पाजामे और अंडरवियर को एक साथ उतार दिया और मेरा लिंग महाराज पूरे जोश में उसे सलामी दे रहा था।

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अक्षिता ने मेरे लिंग महाराज को एक प्यारी सी निगाह से निहारा. फिर उसने अपने कोमल से होंठों से किस किया.

फिर मेरे लिंग महाराज को अपने मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसने लग गयी. उसका यह प्यार मुझे दीवाना किये जा रहा था.

वो पूरा नीचे तक लिंग महाराज मुँह में लेती और फिर ऊपर आते वक्त मेरे लिंग के टोपे को जोर से चूसती.

उसकी इस अदा ने मुझे उसका गुलाम बना लिया.

बस मैं मन ही मन कामदेव को धन्यवाद दे रहा था और कह रहा था कि अब मौत भी आ जाये तो कोई गम नहीं. ऐसी सुंदर काया वाली अप्सरा को पाकर मेरी जिंदगी तो धन्य हो गयी।

मैंने उससे कहा- मैं झड़ने वाला हूं.

तो उसने मेरी बात को नजर अंदाज किया और वो और जोर-जोर से मेरे फटने को हो चुके लौड़े को चूसने लग गयी.

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मेरी वासना का ज्वार भी एक तूफ़ान की तरह फूट पड़ा.

पहले एक धार, फिर दो, फिर तीन-चार-पांच और न जाने कितनी ही बार मेरे लिंग ने मेरा वीर्य को पिचकारी दर पिचकारी करके उसके मुंह में उड़ेल दिया.

वह उसको पी गई. कुछ वीर्य उसको उरोजों पर गिर गया और कुछ उसके मुंह पर लग गया.

इतना वीर्य मेरे लिंग से पहले कभी नहीं निकला था.

मगर हैरानी की बात ये थी कि अब भी मेरा लिंग बैठने को राजी नहीं था.

अब मैंने अक्षिता को वापस अपने नीचे लेटा दिया.

अब बारी थी लिंग महाराज के मिलन की.

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मैंने अक्षिता के होंठों पर किस किया. जैसे उसे इस सुख के लिए धन्यवाद कह रहा हूं.

उसने भी किस में पूरा साथ दिया।

अब अक्षिता का भी सब्र जवाब दे रहा था.

वो बोली- जान … अब डाल दो अपने लण्ड को मेरी चूत में … अब और नहीं सहा जा रहा।

मैंने भी रुकना उचित नहीं समझा.

उसकी टांगें फैलाईं और अपने लिंग महाराज को उसकी चूत की गुलाबी फ़ांकों पर रख कर एक धक्का मारा तो लिंग का मुंड अंदर फंस गया और अक्षिता के मुँह से एक हल्की चीख निकली- उइई माँ …

मैंने सोचा कि ये काम की देवी तो नाम की तरह ही अक्षत है.

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